सोने के दिल वाले नीरज को सलाम

बात कह कौन रहा है इससे उस बात की अहमियत बहुत ज्यादा हो जाती है, उसके प्रभाव का दायरा भी बहुत बड़ा हो जाता है। हिन्दू मुस्लिम वाली लाइन खींच कर लड़ने का चलन जब देश में चरम पर हो, उस दौर में जो कुछ नीरज चोपड़ा कहते नजर आए, निराश दिल में उम्मीद जगा गए कि नहीं, अभी ऐसे माहौल को ठीक करने वाले लोग बचे हैं। जो आगे आकर ऐसा करने वालों को रोक सकते हैं। टोक्यो ओलंपिक में भारत को गोल्ड दिलवा देश में युवा दिलों के धड़कन बने नीरज ने हिन्दू मुस्लिम के बीच कटुता फैलाने वालों को प्यार से ही सही, फटकार लगाई और कहा है कि उनके बयान का बेजा इस्तेमाल न करें।

दरअसल अपने एक पुराने इंटरव्यू में नीरज ने पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम के बारे बताया था कि फाइनल मैच के पहले जब वे अपना जैवलिन लेने पहुंचे तो वो उस जगह नहीं था। पता चला कि नदीम उनका जैवलिन लेकर गए हैं। उन्होंने उससे अपना जैवलिन वापस लिया और फिर उसी जैवलिन से भारत को गोल्ड जीत कर दिया।

मामला किसी मुस्लिम से जुड़ा हो और वो मुस्लिम पाकिस्तान का हो तो माहौल बनाने वालों के लिए इससे अच्छा मौका क्या हो सकता है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक इस पर जमकर बयानबाजी शुरू हो गई। सब के सब नदीम को क्रिमिनल की तरह दिखाने में जुट गए। कोई उसकी उस हरकत को साजिश करार दे रहा था तो किसी के लिए ये इस्लाम की बुराई में कुछ कहने का अच्छा मौका था। पाकिस्तान तो ऑलटाइम फेवरेट विलेन है ही।

लेकिन इन सब लगाम लगाते हुए नीरज खुद मैदान में आए और बकायदा वीडियो जारी कर समझाया कि उनके कहने का मकसद ऐसा बिल्कुल नहीं था। जैवलिन रखने की एक निर्धारित जगह होती है जहां सभी अपना जैवलिन रखते हैं। कोई भी किसी का भी जैवलिन लेकर प्रैक्टिस कर सकता है। ऐसा नियम है। नदीम ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे थे जो गलत था। ये इतनी बड़ी बात नहीं है। मुझे काफी दुख है कि मेरा सहारा लेकर इस बात को इतना बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने से सबसे अनुरोध किया है कि वे ऐसा न करें। सबसे बड़ी बात नीरज ने कही कि ‘स्पोर्ट्स सभी को मिलकर चलना सिखाता है’।

नीरज का ये बयान बेशक छोटा सा लगे, लेकिन उम्मीद जगाती है कि इसका असर बहुत बड़ा होगा। काफी समय के बाद देश में किसी बड़ी हस्ती, खासकर यूथ आइकन टाइप की किसी शख्सियत ने देश को दिशा दिखाने का काम किया है।

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