दिल्ली के उत्तर में पूरब पश्चिम वाला फर्क

बताते चलें..उत्तर पश्चिमी दिल्ली के सांसद हैं हंसराज हंस और उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद हैं मनोज तिवारी।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी का पोस्ट देखा, जिसमें उन्होंने लिखा है कि किराड़ी विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कें, खुली नालियां, कूड़े के ढेर और गंदी गलियों की समस्या के स्थाई समाधान के लिए शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रीयल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, नॉर्थ एमसीडी और डीडीए के अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें उत्तर पश्चिम दिल्ली के सांसद हंसराज हंस और इलाके के अन्य प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

वैसे तो ये किसी मंत्री के किसी सामान्य से ट्वीट की तरह ही था। लेकिन इसमें जिन समस्याओं का जिक्र किया गया था उसका सामना मुखर्जी नगर, नेहरू विहार जैसे देश भर में प्रतिष्ठित इलाके के लोग सालों से कर रहे हैं। ये कोई इंडस्ट्रीयल एरिया तो नहीं लेकिन इसका महत्व उससे कम भी नहीं। क्योंकि ये इलाका देश का एजुकेशन हब है। छोटे बड़े कई सारे कोचिंग इंस्टीच्यूट यहां चलते हैं। कोने कोने में लाइब्रेरी खुली हुई हैं। देश भर के छात्र-छात्रा यहां अपना भविष्य संवारने आते हैं, लंबे समय तक रहते हैं। मतलब यहां की बदहाली न सिर्फ स्थानीय निवासियों के लिए सिरदर्द है, बल्कि इन युवाओं को भी परेशान करती हैं। इनके सामने देश और दिल्ली की सरकारों की गंदी छवि बनाती है।

बावजूद इसके यहां के सांसद मनोज तिवारी कभी भी कुछ ऐसा प्रयास करते नहीं दिखे जो हंसराज हंस ने किया। कम से कम स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय शहरी विकास मंत्री से मिल कर समस्याओं का स्थाई समाधान तलाशने की कोशिश तो कर रहे हैं। दिल्ली सरकार अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से काम करती है। कई बार दिल्ली की जनता के दर्द पर उनके सियासी नफानुकसान का गणित हावी दिखता है। तो वहीं एमसीडी कंगाली का रोना रोती रहती है। ऐसे में हंसराज हंस का प्रयास सराहनीय है। कम से कम केंद्र सरकार को लूप में लेने की कोशिश तो कर रहे हैं।

लेकिन इसके विपरित मनोज तिवारी दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष रहने के बावजूद अपने क्षेत्र के लोगों का भला नहीं कर सके। स्थानीय समस्या का समाधान तलाशने में बिल्कुल भी असफल रहे। बारिश के दिनों में तो इलाके के लोग उन्हें कुछ ज्यादा ही याद करते हैं। नालियां ओवरफ्लो मार रही होती हैं, सड़कें तालाब होने का एहसास कराती है। उस पर से कूड़े के ढेर वातावरण को महकाए रहते हैं। इन सब का सामना होते ही सम्मानित, सेलिब्रिटी छवि वाले चमचमाते सांसद जी का मुस्कुराता चेहरा आंखों के सामने आ जाता है। आप चाह कर भी भूल नहीं सकते उनका चमचमाता चेहरा, क्योंकि देश में हर समय कोई न कोई पर्व त्योहार आता ही रहता है और ऐसे मौकों पर उनकी तस्वीरों, पोस्टरों से पट जाता है पूरा इलाका। साथ ही पार्षद पूजा मदान भी मुस्कुराती हुई त्योहार की बधाई देती दिख जाती हैं। अब सांसद के सामने नीचे वाले जनप्रतिनिधियों को क्या दोष दिया जाए, उनके पास से तो सालों से बस एक ही जवाब है, फंड नहीं है।

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