‘दिल्ली के बदले सियासी मिजाज परेशान करते हैं’

mohalla clinic
मोहल्ला क्लीनिक, नेहरू विहार, सिविल लाइंस

सीनियर सिटीजनंस की भी सोचे सरकार !

यदि कोई समस्या स्थानीय निवासियों की परेशानी बढ़ा रही है तो आप कैसे उसे सिर्फ ये कह कर नजरअंदाज कर सकते हैं कि ये हमारे कार्यक्षेत्र में नहीं आता? सरकारी अधिकारी ऐसा कहें तो बात फिर भी समझ में आती है, लेकिन जन प्रतिनिधियों के मुंह से तो ये बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती। जो भी समस्या है, जिस भी विभाग से जुड़ी है पूरी जिम्मेदारी के साथ संबंधित लोगों से बात कर उसका समाधान उपलब्ध करवाना चाहिए। पिछले कुछ सालों से ही दिल्ली की शासन व्यवस्था कह लीजिए या फिर सियासत, इस तरह की बातों का शोर बढ़ा है। कोई पार्क गंदा है, बात कीजिए तो पता चलता है कि वो डीडीए का है इसलिए एमसीडी वाले उसे साफ नहीं करेंगे। सड़क बदहाल है, उसे ठीक करने की जिम्मेदारी से बिल्कुल बच निकलने की कोशिश करते हैं दिल्ली सरकार से जुड़े लोग, ये कहते हुए कि ये एमसीडी के तहत आता है।

दिल्ली के ये बदले सियासी मिजाज बड़े परेशान करते हैं सीनियर मीडियाकर्मी रामेश्वरी तनवर को, जो पिछले लगभग 35 सालों से सिविल लाइंस के नेहरू विहार में रह रहीं हैं। जिन्होंने इंगलिश डेली न्यूजपेपर स्टेट्स मैन में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं और अब रिटारमेंट का जीवन यहां अपने परिवार के साथ व्यतित कर रही हैं। पिछले कुछ दिनों उन्हें बेडरेस्ट पर रहना पड़ा क्योंकि उनके पैर में मोंच आ गई थी, हड्डी टूटने से बची। जानना चाहिए कि ये कैसे हुआ, क्योंकि ये सिर्फ इनकी कहानी नहीं है, ये सिविल लाइन्स के नेहरू विहार इलाके में रहने वाले हर सीनियर सिटीजन की है। पिछले 20 तारीख को थोड़ी तबियत बिगड़ी तो इलाज के लिए वे मोहल्ला क्लीनिक गईं। यूं तो सामने की मुख्य सड़क सालों से बदहाल है, बारिश की वजह से हालात बहुत ही खराब दिखे। क्लीनिक के सामने जल जमाव था और पास ही कूड़े का ढेर लगा था। बचते बचाते अंदर जाने का प्रयास कर रही थीं कि पैर फिसल गया और वे गिर पड़ीं। बड़ी मुश्किल से इलाज लेकर वापस घर आना हुआ।

सवाल फिर वही खड़ा हो जाता है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने कोई सुविधा जनता को दी है, तो उसे और बेहतर बनाने की बजाए बीजेपी शासित एमसीडी उसे बिगाड़ती दिखती है। मोहल्ला क्लिनिक के सामने की गंदगी इसकी बानगी है।

ऐसा ही कुछ हाल मुख्य सड़क का है। इलाके के सांसद, विधायक और पार्षद, चुनावों के समय सभी जनता को समाधान देने की बात करते हैं। लेकिन उसके बाद बस टोपी ट्रांसफर करते, किसी भी तरह से बचते दिखते हैं। सोचना चाहिए इस सड़क से गुजरना किसी भी सीनियर सिटीजन के लिए कितना मुश्किलों भरा होगा। रामेश्वरी तनवर बताती हैं कि पैदल तो परेशानी होती ही है, गाड़ियों पर सवार होकर भी इस सड़क से गुजरते वक्त बड़ा सतर्क रहना पड़ता है, नहीं तो सड़क के खतरनाक गड्ढों से लगने वाले झटके, कमर दर्द वालों की हालत बिगाड़ देते हैं।

यही हालत दिल्ली के अंदर लॉ एंड आर्डर की भी है। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की आपसी खींचतान का ही नतीजा है, दिल्ली पुलिस गंभीर आरोपों से आसानी से बच निकलती है। चेन स्नैंचिंग जैसे छोटे अपराधों तक पर लगाम लगाने में देश का सबसे सक्षम माना जाने वाला पुलिस विभाग आज की तारीख में लाचार दिखने लगा है।

अगर सरकार में बैठे में लोग जनहित को ध्यान रखते हुए, आपस में तालमेल बनाते चलें तो सभी सरकारी संसाधनों और सुविधाओं का समुचित तरीके से इस्तेमाल हो सकेगा और इससे दिल्ली में रहने वालों लोगों को वास्तविक अर्थों में राष्ट्रीय राजधानी में रहने का गौरव हासिल हो सकेगा। 

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