‘गुलामी की तरफ कदम बढ़ते कदम’

किसान आंदोलन पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

#किसान के साथ #कांग्रेस   

कांग्रेस की तरफ से #राहुल_गांधी ने देश को आगाह किया कि #किसान_आंदोलन को लेकर रुखा रवैया भविष्य में रुलाने वाला है।

देश के हर औद्योगिक सेक्टर में चार पांच औद्योगिक घरानों का एकाधिकार होता जा रहा है। चाहे वो पावर सेक्टर हो, एयरपोर्ट या पोर्ट हो या फिर टेलिकॉम सेक्टर ही क्यों न हो, हर किसी पर इन्हीं का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। मतलब इस देश को चलाने वाले चार पांच मालिक आज की तारीख में खड़े हो रहे हैं।

आज तक खेती में किसी भी तरह का एकाधिकार स्थापित नहीं हो पाया, इसी वजह से इससे होने वाले लाभ के हिस्सेदारों में किसान, गरीब व देश का मिडल क्लास शामिल रहा। बकायदा एक पूरा ढ़ांचा था, जो इनके हितों की रक्षा करता रहा। उसमें मंडियां शामिल थी, उसमें एसेंशियल कमोडिटी एक्ट शामिल था, सबको संरक्षित करने वाली कानूनी व्यवस्था शामिल थी। सरकार के द्वारा लाए गए तीनों ही नए #कृषि_कानून आजादी के पहले वाले हालात पैदा करने वाले हैं। चार पांच औद्योगिक घरानों के चंगुल में आ जाएगी पूरी की पूरी #कृषि व्यवस्था।

इसी आशंका के डर से किसान आंदोलन कर रहे हैं। वे सिर्फ अपनी रक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे देश की #गरीब_जनता और मध्यम वर्ग के हितों को संरक्षित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके भोजन की रक्षा कर रहे हैं। देश के युवाओं और #मध्यमवर्ग की जिम्मेदारी है कि सभी मिल कर किसानों का समर्थन करें।

ये वर्तमान की लड़ाई की नहीं है ये भविष्य सहेजने की जंग है। जो देश ने इतने लंबे साल के संघर्ष और समझदारी से हासिल किया है, उसे नष्ट करने की साजिश रची जा रही है। तीनों ही कृषि कानून देश की ताकत रहे कृषि तंत्र को कमजोर करने वाले हैं। इन्हें कुछ इस तरह तैयार किया गया है, जो समय के साथ मौजूदा कृषि व्यवस्था को नष्ट कर देंगे। सबसे पहले #मंडी_व्यवस्था के वजूद को खत्म कर दिया जाएगा, एसेंशियल कमोडिटी एक्ट को खत्म कर दिया गया, मतलब जमाखोरी की छूट, और सबसे अंत में ये सुनिश्चित किया गया कि कोई भी किसान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट तक नहीं जा सकता।

दुखद है कि देश बस देख रहा है। देश इस पूरे मसले की गंभीरता को समझ नहीं पा रहा है। जनता को गुमराह किया जा रहा है। जल्दी है ऐसे हालात बन जाएंगे जब कृषि उत्पादों की कीमत हमारी पहुंच से बहुत बाहर चली जाएगी। समझना होगा, आज जिस दर पर हम चावल या गेहूं खरीद पा रहे है वो इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि मंडी व्यवस्था काम कर रही है, खेती किसानी के मौजूदा ढांचे की वजह से कीमतों पर नियंत्रण बना हुआ है। इनके कमजोर होने या खत्म होने के बाद हालात निसंदेह नियंत्रण से बाहर चले जाएंगे। इसलिए ये हमला केवल किसानों पर नहीं है, ये हर भारतीय पर हमला है।  

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