CM रहे मोदी ने तब MSP पर लिखित आश्वासन मांगा..अब क्या दिक्कत – पवन खेड़ा

दिल्ली कांग्रेस का वर्चुअल किसान सम्मेलन

मौखिक आश्वासन से देश नहीं चलता है। साल 2011 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से एमएसपी के मुद्दे पर लिखित आश्वासन की मांग करते थे। फिर आज क्यों वो किसान बिल में एमएसपी को लेकर लिखित आश्वासन देश के किसानों को नहीं दे पा रहे हैं। मोदी सरकार जीएसटी पर लिखित आश्वासन देने के बावजूद आज राज्य सरकारों को उसका हिस्सा देने से मुकर रही है तो फिर ऐसी सरकार के मौखिक आश्वासन पर कैसे भरोसा करे कोई – कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दिल्ली कांग्रेस के वर्चुअल किसान सम्मेलन में मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला।  

इस बिल से राज्य सरकारों को होने वाले नुकसान की बात भी पवन खेड़ा ने उठाई। मंडी व्यवस्था में दो फीस लिए जाते हैं। मार्केट फीस और डेवलेपमेंट फंड। राज्य सरकारों से इससे काफी फायदा मिलता है। ग्रामीण व्यवस्था में डेवलपमेंट फंड का बड़ा योगदान होता है। दिल्ली में शीला दीक्षित भी इस फंड का इस्तेमाल यहां के विकास में लगाती रहीं। जब मंडी में किसान जाएगा नहीं तो यह पैसा राज्य सरकारों को मिलेगा नहीं।

इसके साथ ही मंडी व्यवस्था के तहत जो खाद्यान संबंधी आंकड़े सरकारों के पास पहुंचते हैं उनका विशेष महत्व होता है। अगर फसल किसान के खेत में ही बिक गई तो सरकारों को कैसे पता चलेगा कि किस फसल का कितना उत्पादन देश में हुआ? किस व्यापारी के पास कितनी और कौन सी फसल इकट्ठा है? अगर कल की तारीख में आज की तरह महामारी का बुरा वक्त आता है तो सरकारों के पास खाद्यानों का कोई आंकड़ा ही नहीं होगा। ऐसी स्थिति में जिस व्यापारी के पास जितना अन्ऩ जमा होगा वो मनमानी कीमत वसूल करेगा।

एपीएमसी में भ्रष्टाचार है इससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता। लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं की आप व्यवस्था को ही खत्म कर देंगे। यह तो वही बात हुई कि ट्रैफिक सिग्नल पर पुलिस वाले अवैध वसूली करते हैं तो आप सारे के सारे सिग्नल ही खत्म कर देंगे।

यूपी से जुड़े वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह बिल कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग की बात करता है। अगर कोई बड़ा बिजनेसमैन किसानों से जमीन का कॉन्ट्रेक्ट करेगा तो जाहिर है कि वह सारी जमीन को पहले मिलाएगा फिर उस पर खेती शुरू करेगा। ऐसे में पांच छह सालों के बाद जमीन की सीमा निर्धारण में आने वाली दिक्कतों के बारे सोचा जाए। अगर किसान डील से बाहर आता है और अपनी जमीन वापस लेता है तो उस वक्त उसकी परेशानी कितनी बढ़ जाएगी इस पर विचार करें सभी।

सरकार कहती है कि किसान देश में कही भी जाकर अपनी फसल बेच सकता है। लेकिन यह बताएं कि मंडी की व्यवस्था खत्म हो जाएगी तो किसान दूसरे राज्य में अपनी फसल ले जाकर कहां रख कर बेचेगा?

यूपी में किसानों को आज की तारीख में भी गेहूं का सही रेट नहीं मिल रहा है। पहले इस महीने में किसानों को गेहूं का सबसे अच्छा रेट मिलता था। बिल आने के बाद अभी से इसकी मार किसानों पर पड़ने लगी है।

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी तबियत खराब होने की वजह से कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पाए। उनका वीडियों संदेश सभा में चलाया गया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में गलत तरीके से इस बिल को पास किया गया। बड़े बिजनेस घरानों के हित में मोदी सरकार काम कर रही है। एमएसपी के नाम पर गुमराह करने का काम किया जा रहा है। बिल में इसका कोई लिखित प्रावधान नहीं किया जा रहा है। प्रधानमंत्री पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं देश के किसान।

दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अमृता धवन ने कहा कि आढ़तियों की छवि बहुत बिगड़ गई है इस किसान कानून के चर्चा में आने के बाद से। हर कोई उन्हें अचानक बहुत ही बुरी नजर से देखने लगा है। किसानों और व्यापारियों के बीच इनकी भूमिका इतनी महत्वपूर्ण रही है। एजेंट के रूप में जो लोग किसानों से फीस लेकर सरकारी कोष में पैसा डालने का काम कर रहे हैं वे इतने बुरे कैसे हो सकते हैं। अगर ये लोग गलत काम कर रहे हैं तो इन्हें सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए। बीजेपी वालों ने इन्हें ही विलेन बना दिया है। और तो और किसानों और आढ़तियों को आमने सामने लड़ने के लिए खड़ा कर दिया है। लड़वाने में तो माहिर रही ही है बीजेपी।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को किसान सम्मेलन का वर्चुअल आयोजन किया। जिसमें दिल्ली के सभी जिलों से किसानों और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को इंटरनेट के जरिए जोड़ा गया। इस सम्मेलन में बीजेपी सरकार के किसान बिल पर चर्चा हुई। सभी ने एक सुर में इस बिल को किसानों के साथ साथ देश विरोधी बताया। मंशा साफ की कि जब तक मोदी सरकार इस बिल को वापस नहीं ले लेती कांग्रेस इसका विरोध जारी रखेगी।

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