दलित युवक की मौत पर सियासत तेज

नॉर्थ दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में एक दलित युवक का दूसरे धर्म की लड़की के साथ दोस्ती रखना जानलेवा साबित हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा राहुल साथ में ट्यूशन भी पढ़ाया करता था। घटना वाले दिन उसे ट्यूशन के नाम पर ही बुलाया गया और लड़की के परिजनों ने पीट पीट कर अधमरा कर दिया। घटना की खबर उसके चाचा को मिली। वे उसे बचाने दौड़े। किसी तरह पीटने वालों के चंगुल से छुड़ा कर अस्पताल ले गए। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

बात बेशक कानून व्यवस्था की हो, पुलिस के खत्म होते खौफ की हो। कैसे कोई देश की राजधानी में ऐसा सोच लेता है कि वो किसी को भी खुलेआम पीट सकता है। उसकी जान ले सकता है। घटना साफ बताती है कि दिल्ली पुलिस अपनी व्यवस्था जमाने में नाकाम होती जा रही है। लेकिन किसी दलित का नाम आना और साथ में दूसरे धर्म से इसका जुड़ जाना सियासत वालों को सूट करता है। और हो भी क्यों नहीं यूपी के हाथरस की घटना ने बीजेपी की इतनी फजीहत जो कर दी। वहां भी तो मामला दलितों से जुड़ा था। ऐसे में राजधानी में कैसे चुप बैठती बीजेपी। दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता राहुल के परिजनों से मिलने शनिवार को पहंचे। परिजनों को सांत्वना देने के साथ ही सियासी दांव खेलना नहीं भूले। दिल्ली की केजरीवाल सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि हाथरस की घटना को लेकर तो पार्टी इतनी मुखर रही, फिर दिल्ली के दलित युवक की हत्या पर मौन क्यों साध रखी है? क्यों नहीं उसके लिए अभी तक किसी मुआवजे की घोषणा की गई है?

आम आदमी पार्टी पर सियासी दबाव बढ़ गया। आनन फानन में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया मृतक के परिवार वालों से मिलने पहुंच गए। उन्हें 10 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की और कहा कि न्याय दिलवाने में दिल्ली सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। अच्छे से अच्छा वकील केस की पैरवी के लिए लगाया जाएगा। हां इस बीच दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येन्द्र जैन का बयान दिल्ली पुलिस के बहाने बीजेपी को घेरते हुए आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली में कानून व्यवस्था बनाए रखना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

ऐसे में भाजपा कहां चुप बैठने वाली थी। राहुल की हत्या के मामले को अंकित सक्सेना की मौत से जोड़ दिया। साल 2018 में ठीक इसी तरह अंकित सक्सेना नाम के लड़के की हत्या दूसरे धर्म के लोगों ने खुलेआम पीट पीटकर कर दी थी। आरोप यह भी लगाया कि मुआवजे का भुगतान अभी तक दिल्ली सरकार अंकित के परिजनों नहीं करवा सकी। इस तरह एक धर्म विशेष को घेरते हुए आम आदमी पार्टी पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया। इसी तरह की सियासत की देऩ अंकित की तर्ज पर राहुल की हत्या को बताया गया।

कानून व्यवस्था के मामले में इस तरह मजहबी रंग देकर मामले को हल्का करना या डायवर्ट करना एक गलत परंपरा है। जिसका लाभ समाज के गलत लोग उठाते हैं। यह किसी भी आम नागरिक के लिए भी फायदेमंद नहीं हो सकती। इस पर अंकुश लगना ही चाहिए। कानून व्यवस्था बुलंद हो तो बिना किसी धार्मिक या जातिगत भेदभाव के इसका लाभ पूरे समाज को मिलता है।

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